व्यष्टि अर्थशास्त्र

प्रश्न 3 व्यष्टि अर्थशास्त्र का महत्त्व समझिए

Answer : व्यष्टिगत अर्थशास्त्र का महत्व और प्रयोग अर्थशास्त्र में व्यष्टिगत अर्थशास्त्र का सैद्धान्तिक और व्यावहारिक दोनों ही महत्व है। जैसा कि निम्नलिखित विवरण से स्पष्ट है- ।

(1) अर्थव्यवस्था की कार्यप्रणाली को समझना- प्रो. वाटसन के शब्दों में, “व्यष्टिगत अर्थशास्त्र के विभिन्न उपयोग हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण तो यह है कि इसमें हम स्वतन्त्र निजी उद्यम अर्थशास्त्र के कार्य-चालन को भली प्रकार से समझ सकते हैं।”

चूँकि व्यक्तिगत आर्थिक इकाइयाँ ही परस्पर मिलकर एक अर्थव्यवस्था का निर्माण करती हैं और उन इकाइयों के आर्थिक व्यवहार का सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था पर काफी प्रभाव. भी पड़ता है; इसलिए सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था को समझने के लिए यह आवश्यक हो जाता है कि विभिन्न आर्थिक इकाइयों का व्यक्तिगत रूप से विश्लेषण किया जाये।

(2) आर्थिक नीतियों का सुझाव- व्यष्टिगत आर्थिक सिद्धान्त केवल अर्थव्यवस्था के वास्तविक कार्य-चालन का ही वर्णन नहीं करता बल्कि इसका कार्य आदर्शवादी भी है क्योंकि यह उन नीतियों का भी सुझाव देता है जिससे व्यक्तियों के कल्याण या सन्तुष्टि को अधिकतम करने के लिए आर्थिक व्यवस्था में अकार्यकुशलता को दूर किया जा सके।

यह राज्य की आर्थिक नीतियों का मूल्यांकन करने के लिए विश्लेषणात्मक उपकरण भी प्रदान करता है। कीमत या मूल्य प्रणाली एक उपकरण है जो कार्य में सहायता देता है ।।

(3) आर्थिक कल्याण- व्यष्टि अर्थशास्त्र द्वारा आर्थिक कल्याण की दशाओं का ज्ञान प्राप्त किया जा सकता है । यह आदर्शात्मक अर्थशास्त्र का मुख्य विषय है । व्यष्टि अर्थशास्त्र इस बात का सुझाव देता है कि आर्थिक कल्याण के आदर्श को कैसे प्राप्त किया जा सकता है।

(4) प्रबन्ध सम्बन्धी निर्णय- व्यावसायिक फर्मे व्यष्टि अर्थशास्त्र का प्रयोग प्रबन्ध सम्बन्धी निर्णय लेने के लिए करती हैं। इस सम्बन्ध में लागतों तथा माँग के विश्लेषण द्वारा बनायी गयी नीतियों का बहुत महत्व है।

(5) अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार में सहयोग- व्यष्टिगत अर्थशास्त्र के द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार की समस्याओं, जैसे-व्यापार-शेष असन्तुलन, विदेशी विनिमय दर आदि को समझा जा सकता ।

(6) राजस्व में उद्योग- व्यष्टिगत आर्थिक विश्लेषण की सहायता से ही उन घटकों का विश्लेषण किया जाता है तो उत्पादकों तथा विक्रेताओं या क्रेताओं के मध्य किसी वस्तु पर लगे कर के भार के वितरण को बताते हैं । व्यष्टिगत अर्थशास्त्र को एक कर के कल्याणकारी परिणामों की व्याख्या करने में उपयोग किया जाता है । यह कर साधनों को अपने अनुकूलतम स्तर से पुनर्विभाजन की ओर ले जाता है। व्यष्टिगत अर्थशास्त्र यह समझाने में सहायता करता है कि सामाजिक कल्याण की दृष्टि से एक आय कर अच्छा है या बिक्री कर। आय कर की तुलना में बिक्री कर सामाजिक कल्याण में कमी लाता है ।

(7) वास्तविक आर्थिक घटनाओं के लिए मॉडलों का निर्माण एवं प्रयोग- व्यष्टिगत अर्थशास्त्र वास्तविक आर्थिक घटनाओं को समझने के लिए मॉडलों का निर्माण करता है और उनका प्रयोग कराता है। प्रो. लर्नर के शब्दों में, “व्यष्टिगत अर्थशास्त्र यह समझने की सुविधा देती है कि बुरी तरह से जटिल अस्त-व्यस्त असंख्य तथ्यों के लिए व्यवहार के मॉडल बनकर जो काफी हद तक वास्तविक घटनाओं के समान होते हैं, उनके समझने में सहायक होगा।”

(8) व्यक्तिगत इकाइयों के आर्थिक निर्णय में सहायक- व्यष्टिगत अर्थशास्त्र व्यक्तियों, परिवारों, फर्मों आदि को अपने-अपने आर्थिक व्यवहार के सम्बन्ध में उचित निर्णय लेने की क्षमता उपलब्ध कराता है, जैसे-प्रत्येक उपभोक्ता सीमित साधनों से अधिकतम सन्तुष्टि प्राप्त करना चाहता है। आज तो प्रत्येक फर्म माँग विश्लेषण तथा रेखीय प्रोग्रामिंग का उपयोग करके अधिकतम लाभ प्राप्त करने का प्रयत्न करती है इन सब बातों का अध्ययन सूक्ष्म अर्थशास्त्र में ही सम्भव

(9) अन्य उपयोग व महत्व-

(अ) व्यष्टिगते अर्थशास्त्र व्यापार के प्रबन्धकों को वर्तमान साधनों से अधिकतम उत्पादन प्राप्त करने में सहायक होता है । वह इसी की सहायता से उपभोक्ता की माँग को जानने और अपनी वस्तु की लागतों का आगणन करने में समर्थ होता है।

(ब) व्यष्टिगतं अर्थशास्त्र का उपयोग साधनों के अनुकूलतम उपयोग और स्थिरता के साथ विकास प्राप्त करने के लिए किया जाता है।

(स) यह व्यक्तिगत आय, व्यय, बचत आदि के स्रोतों और स्वभाव पर प्रकाश डालता है जो सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था के विश्लेषण में भी सहायक होता है ।

(द) व्यष्टिगत अर्थशास्त्र हमें सप्रतिबन्ध भविष्यवाणियों में सहायता देता है।


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