व्यष्टि अर्थशास्त्र

प्रश्न 1 व्यष्टि अर्थशास्त्र को परिभाषित कीजिए।

उत्तर
व्यष्टि अर्थशास्त्र का अर्थ ‘माइक्रो' शब्द ग्रीक भाषा के ‘मिक्रोस' शब्द से बना है जिसका अर्थ छोटा होता है । इस प्रकार माइक्रो छोटी इकाइयों से सम्बन्धित है। व्यष्टिगत अर्थशास्त्र में किसी अर्थ-व्यवस्था की भिन्न-भिन्न छोटी-छोटी इकाइयों की आर्थिक क्रियाओं का विश्लेषण किया जाता है । दूसरे शब्दों में, व्यष्टिगत अर्थशास्त्र के अन्तर्गत विशेष व्यक्तियों, परिवार, फर्मों, उद्योगों, विशेष श्रमिक आदि का विश्लेषण किया जाता है। उदाहरण के लिए, एक उपभोक्ता अपनी आय तथा व्यय में किस प्रकार सन्तुलन स्थापित करता है । एक उत्पादक अपनी फैक्ट्री में उत्पादन का प्रबन्ध किसे प्रकार करता है, किसी एक वस्तु, जैसे-गेहूँ या घी की कीमत किस प्रकार निर्धारित होती है आदि ऐसी अनेक आर्थिक समस्याएं हैं जिनका अध्ययन व्यष्टिगत अर्थशास्त्र में किया जाता हैं । इसमें उदाहरणार्थ निम्न प्रकार के प्रश्नों का अध्ययन किया जाता है-एक उपभोक्ता दी हुई कीमतों एवं दी हुई आमदनी से किस प्रकार अधिकतम सन्तोष प्राप्त करता है ? एक फर्म दी हुई कीमत पर कितना उत्पादन करेगी ? एक उद्योग में वस्तु की कीमत कैसे निर्धारित होगी? उत्पादन के साधनों के पारितोषण का निर्धारण कैसे होगा? विभिन्न उद्योगों में उत्पादन के साधनों का आबंटन किस प्रकार होगा ?

परिभाषाएं

व्यष्टिगत अर्थशास्त्र की कुछ प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं

(1) प्रो. बोल्डिग ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक 'आर्थिक विश्लेषणं' में लिखा है। कि “व्यष्टिगत अर्थशास्त्र के अन्तर्गत विशेष फर्मों, विशेष परिवारों, वैयक्तिक कीमतों, मजदूरियों, आयों आदि वस्तुओं का अध्ययन किया जाता है। एक अन्य पुस्तक में प्रो. बोल्डिग ने लिखा है कि “व्यष्टिगत अर्थशास्त्र विशिष्ट आर्थिक घटकों एवं उनकी पारस्परिक प्रतिक्रिया और इसमें विशिष्ट आर्थिक मात्राओं तथा उनका निर्धारण भी सम्मिलित है, का अध्ययन है।”

(2) हैण्डर्सन क्वाण्ट के शब्दों में, “व्यष्टिगत अर्थशास्त्र व्यक्तियों के सुपरिभाषित समूहों के आर्थिक कार्यों का अध्ययनं है।”

(3) प्रो. मेहता ने व्यष्टिगत अर्थशास्त्र को कूसो की अर्थव्यवस्था की संज्ञा दी है क्योंकि सम्बन्ध मुख्य रूप से वैयक्तिक इकाइयों से रहता है।

(4) गार्डनर एकले की मान्यता के अनुसार, “व्यष्टिगत अर्थशास्त्र उद्योगों, उत्पादन एवं फर्मों में कुछ उत्पादन के विभाजन तथा प्रतिस्पर्धी उपभोग के लिए साधनों के वितरण का अध्ययन करता है। यह आय वितरण समस्या का अध्ययन करता है। विशेष वस्तुओं और सेवाओं के सापेक्षिक मूल्यों में इनकी रुचि रहती है।”

(5) प्रो. चेम्बरलेन के शब्दों में, “व्यष्टिगत अर्थशास्त्र पूर्णतया व्यक्तिगत व्याख्या पर आधारित है तथा इसका सम्बन्ध अन्तर्वैयक्तिक सम्बन्धों से भी होता है।”

इन परिभाषाओं से स्पष्ट है कि व्यष्टिगत अर्थशास्त्र का सम्बन्ध किसी एक इकाई से होता है, सभी इकाइयों से नहीं । व्यष्टिगत अर्थशास्त्र में भी यद्यपि योगों का अध्ययन किया जाता है किन्तु ये योग सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था से सम्बन्धित नहीं होते। संक्षेप में, जैसा विलियम फैलनर ने कहा है कि “व्यष्टिगत अर्थशास्त्र का सम्बन्ध व्यक्तिगत निर्णय निर्माता इकाइयों से संक्षेप में कहा जा सकता है कि व्यष्टिगत अर्थशास्त्र आर्थिक विश्लेषण की वह शाखा है जो विशिष्ट आर्थिक इकाइयों तथा अर्थव्यवस्था के छोटे भागों, उनके व्यवहार तथा उनके पारस्परिक सम्बन्धों का अध्ययन करती है। व्यष्टिगत आर्थिक इकाइयों और अर्थव्यवस्था के छोटे अंगों को ‘सूक्ष्म चरों' या सूक्ष्म मात्राएं' भी कहते हैं। अतः व्यष्टिगत अर्थशास्त्र सूक्ष्म मात्राओं व सूक्ष्म चरों के व्यवहार का अध्ययन करता है।

व्यष्टिगत अर्थशास्त्र को "कीमत सिद्धान्त" भी कहा जाता है । 18वीं-19वीं शताब्दी में इसको मूल्य का सिद्धान्त कहा जाता था। व्यष्टिगत अर्थशास्त्र को कभी-कभी ‘सामान्य सन्तुलन विश्लेषण' भी कहा जाता है । कुछ अर्थशास्त्री व्यष्टिगत अर्थशास्त्र को ‘कीमत तथा उत्पादन का सिद्धान्त' भी कहते हैं। व्यष्टिगत अर्थशास्त्र अर्थव्यवस्था को बहुत छोटे टुकड़ों या भागों में बॉटकर अध्ययन करता है, इसलिए व्यष्टिगत अर्थशास्त्र को कभी-कभी ‘फॉके या कतले करने की रीति, स्लाइसिंग की रीति' भी कहा जाता है

व्यष्टिगत अर्थशास्त्र की कुछ प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं

(1) व्यक्तिगत इकाइयों का अध्ययन- व्यष्टिगत अर्थशास्त्र व्यक्तिगत आय, व्यक्तिगत उत्पादन और व्यक्तिगत उपभोग की व्याख्या में सहायता करता है । इसका सम्बन्ध समूहों या व्यापारिक स्थितियों से नहीं है ।

(2) सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था पर प्रभाव का अभाव- व्यष्टिगत अर्थशास्त्र में एक इकाई का रूप इतना छोटा होता है कि इसके द्वारा किये गये परिवर्तन का सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था पर कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ता।

(3) सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था को स्थिर मान लेना- व्यष्टिगत अर्थशास्त्र में किसी एक इकाई के आर्थिक व्यवहार की जांच और विश्लेषण करते समय देश की सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था से सम्बन्धित बातों, जैसे-राष्ट्रीय आय, कीमतों का स्तर, देश का कुल पूँजी विनियोग, कुल बचत तथा सरकार की आर्थिक नीति आदि को स्थिर मान लिया जाता है।

(4) कीमत सिद्धान्त- कुछ अर्थशास्त्री इसे कीमत सिद्धान्त का नाम देकर बताते हैं कि इसके अन्तर्गत माँग एवं पूर्ति द्वारा विभिन्न वस्तुओं के व्यक्तिगत मूल्य निर्धारित किये जाते हैं।


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