Hindi-Language-And-Moral-Values

प्रश्न 7 : राजा भोज की सभा में विद्वानों को सम्मानित करने की प्रथा के विषय में लिखिए।

उत्तर- भारती भवन में भोजदेव के समय में ही विद्वानों की सभा होती थी। विक्रम की सभा की तरह इस सभा में भी अनेक देशों के विद्वान और कवि थे। उनमें नवसाहसांकचरितकार परिमल अथवा पदम गुप्त, धनपाल, भट्टगोविन्द, विद्यापति, भास्करभट्ट, छित्तप, शंकर, निचुल, विनायक, वररुचि, धनिक और धनंजय प्रमुख थे। इस भोज सभा में विद्वानों की परीक्षाएँ होती थीं और उन्हें योग्य पारितोषिक तथा पदवियाँ दी जाती थीं।

संस्कृत काव्य में समस्या पूर्ति करने की प्रथा है। समस्यापूर्ति कवि की एक प्रकार की परीक्षा है, जिसके द्वारा कवि की कविता शक्ति और प्रतिभा का थोड़े में ही परिचय हो जाता है। विद्वानों का मत है कि भोजदेव के सभय में इसका अधिक प्रचार था। भोज प्रबन्ध नामक ग्रंथ में समस्यापूर्ति के अनेक उदाहरण पाए जाते हैं।


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