Hindi-Language-And-Moral-Values

प्रश्न 2: राजा भोज की ऐतिहासिकता सिद्ध कीजिए।

उत्तर- राजा भोज की ऐतिहासिकता।

1. माहूर से धार तक-माहूर और कन्नौज के बीच उतना ही अन्तर है जितना कि कन्नौज और बजान के बीच, अर्थात् 28 फर्सख। यदि कोई मनुष्य माहूर से उज्जैन जाए तो उसे रास्ते में ऐसे ग्राम मिलेंगे, जिनका आपस में पाँच फर्सख और इससे कम अन्तर है। पैंतीस फर्सख चलने के बाद वह दूदही नामक एक बड़े गाँव में पहुँचेगा। जहाँ से बामहूर दूदही से 17 फर्सख, भेलसा 5 फर्सख, जो कि हिन्दुओं का एक परम प्रसिद्ध स्थान है। इस स्थान का नाम और वहाँ की देव-मूर्ति का नाम एक ही है। वहाँ से अर्दीन 9. फर्सख है। जिस देव-मूर्ति का वहाँ पूजन होता है, उसका नाम महाकाल है। धार 7 फर्सख है।।

2. बजान मंदगिर-बजान से दक्षिण की ओर चलकर मेवाड़ में आते हैं, जो कि बजान से 25 फर्सख है। यह एक राज्य है जिसकी राजधानी जंतरौर है। इस नगर से मालवे और उसकी राजधानी धार का अन्तर 20 फर्सख है। उज्जैन नगर 7 फर्सख घर के पूर्व है। उज्जैन से भेलसा तक, जो कि मालवा में ही है, 10 फर्सख को अन्तर है। | धार से दक्षिण की ओर चलने से ये स्थान आते हैं- भूमिहर, धार से 20 फर्सख, कंड फर्सख, नमावुर नर्मदा के तट पर 10 फर्सख, अलीस 20 फर्सख, मंदगिर गोदावरी के तट पर 60 फर्सख। |

3. धार से तान तक–फिर धार से दक्षिण दिशा में चलने पर ये स्थान मिलते हैं। नमिय्य की घाटी, धार से 7 फर्सख, महरट्टा देश 18 फर्सख, कुंकन प्रान्त और समुद्र तट पर इसकी राजधानी तान 25 फर्सख है। इन वृत्तान्तों में दूरी के माप के लिए फर्सख शब्द का प्रयोग हुआ है। एक फर्सख चार मील अर्थात् 6 किलोमीटर का होता है। इसमें जिन नामों और स्थानों का उल्लेख हुआ है, वे आज भी अस्तित्व में हैं। इससे भोजदेव की ऐतिहासिकता स्वतः प्रमाणित हो जाती है।


hi