entrepreneurship-development

2 उद्यमी की परिभाषा दीजिए। उसकी प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए।

उत्तर : उद्यमी का अर्थ प्रायः उद्यमी उस व्यक्ति को कहा जाता है जो नया उपक्रम प्रारंभ करता है, जरूरी संसाधनों को जुटाता है एवं व्यवसाय की क्रियाओं का प्रबंधत था नियंत्रण करता है। वह व्यवसाय की विभिन्न जोखिमों को झेलता है एवं व्यावसायिक चुनौतियों का सामना करता है। जोखिम वहन करना उद्यमी का मुख्य कार्य है। पर आधुनिक युग में उसे उद्यमी का एक मात्र लक्षण नहीं माना जा सकता है। अतः जोखिम उठाने के साथ-साथ व्यवसाय में नई वस्तुओं, यंत्रों तथा विधियों को स्थान देने वाले व्यक्ति को‘ उद्यमी' के रूप में देखा जाने लगा है।

उद्यमी की परिभाषा

(I) परंपरागत अर्थ व्यवस्था में।

1. एफ.वी. हाने के शब्दों में, “उत्पत्ति में निहित जोखिम उठाने वाला साधन उद्यमी होता है।”
2. रिचर्ड केन्टी लॉन के शब्दों में, “उद्यमी वह व्यवसायी है जो उत्पत्ति के साधनों को निश्चित मूल्यों पर बेचता है।”
3. फेंकनाइट के शब्दों में, “उद्यमी वह विशिष्ट समूह या व्यक्ति है जो ‘जोखिम सहते हैं एवं अनिश्चितता की व्यवस्था करते हैं।”

(II) विकासशील अर्थव्यवस्था में।
1. अल्फ्रेड मार्शल के अनुसार, “उद्यमी वह व्यक्ति है जो जोखिम उठाने का साहस करता है, किसी कार्य हेतु आवश्यक पूँजी तथा श्रम की व्यवस्था करता है, जो इसकी सामान्य योजना बनाता है एवं जो इसकी छोटी-छोटी बातों का निरीक्षण करता है।”
2. जेम्बर्स बर्न के शब्दों में, “उद्यमी वह व्यक्ति या व्यक्तियों का समूह है जो कि सीन ये उपक्रम की स्थापना हेतु उत्तरदायी होता है।”
3. आर.टी. इली के शब्दों में, “उद्यमी वह व्यक्ति है जो उत्पादक घटक को संगठित तथा निर्देशित करता है।”

(III) विकसित अर्थ व्यवस्था में ।
1. जोसेफ ए. शुम्पीटर के शब्दों में, “उद्यमी वह व्यक्ति है जो किसी अवसर की पूर्व-कल्पना करता है एवं किसी नयी वस्तु, नयी उत्पादन विधि, नये कच्चेमाल, नये बाजार या उत्पादन के साधनों के नये संयोजन को अपनाते हुए अवसर का लाभ उठाता
2. हर्बट नइवेन्स के अनुसार, ''उद्यमी प्रबंधक से बड़ा होता है। वह नव प्रवर्तक तथा प्रवर्तक दोनों हैं।”
3. हर्बट नइवेन्स के अनुसार, “उद्यमी वह व्यक्ति या व्यक्तियों का समूह है जिसे संचालित किए जाने वाले व्यवसाय के निर्धारण का कार्य करना होता है

(IV) सरल परिभाषा
“उद्यमी वह व्यक्ति है जो व्यवसाय में लाभप्रद अवसरों की खोज करता है, आर्थिक संसाधनों को संयोजित करता है, नवकरणों को जन्म देता है एवं उपक्रम में निहित विभिन्न जोखिमों और अनिश्चितताओं का उचित प्रबंध करता है।”

उद्यमी की विशेषताएं

1. व्यक्ति अथवा व्यक्तियों का समूह-उद्यमी व्यक्ति या व्यक्तियों का समूह होता है। छोटे उपक्रम में एकाकी व्यक्ति ही उद्यमी की भूमिका निभाते हैं। पर आधुनिक युग में व्यवसाय की स्थापना बड़ी-बड़ी कंपनियों तथा निगमों के रूप में की जाने लगी है, जिनके प्रबंध तथा संचालन के लिए संयुक्त उद्यमियों की जरूरत होती है।

2. जोखिम वहनकर्ता-उद्यमी व्यक्ति हमेशा जोखिमों में जीना पसंद करता है। व्यवसाय में कई जोखिमों का ठीक-ठीक पूर्वानुमान करना अत्यंत कठिन होता है। उद्यमी अपनी विवेकपूर्ण योजनाओं तथा ठोस निर्णयों से जोखिमों का सामना करते हैं। साहसी हमेशा सामान्य जोखिम लेखा ही पसंद करते हैं, अत्यधिक जोखिम नहीं। उनका हर निर्णय संतुलित होता है, जुआरी की भाँति आवेश में लिया हुआ नहीं।

3. साधन प्रदान करने वाला-उद्यमी उपक्रम की स्थापना हेतु सभी जरूरी साधनों जैसे-पूँजी, श्रम, भूमि, यंत्र आदि की व्यवस्था करता है। वह व्यवसाय में जरूरी सभी सूचनाएं तकनीक तथा तथ्य उपलब्ध कराता है।

4. नये उपक्रम की स्थापना-विकासशील राष्ट्रों में उत्पादन सीमित होने के कारण उत्पादन तथा वितरण का कार्य महत्वपूर्ण होता है। विकसित देशों में भी उद्यमी नये-नये उपक्रमों को स्थापित करके औद्योगिक क्रियाओं का विस्तार करतेहैं।

5. नव प्रवर्तनकर्ता-उद्यमी अपने व्यवसाय में हमेशा नवीन परिवर्तनों तथा नये सुधारों को स्थान देते हैं। वे नयी वस्तु, नयी उत्पादक विधि, नये यंत्र, नये कच्चे माल एवं नये बाजारों की खोज करते हैं।

6. उच्च उपलब्धियों में विश्वास-उद्यमी हमेशा कठोर परिश्रम तथा दृढ़ संकल्प के द्वारा उच्च प्राप्तियों में विश्वास रखते हैं।

7. 'कार्य' ही संतुष्टि-उद्यमी व्यक्तियों के लिए उनका 'कार्य' ही अपने आप में लक्ष्य तथा संतुष्टि का एक बड़ा स्रोत होता है। हालांकि वे सामाजिक प्रतिष्ठात था आत्म-संतुष्टि के साथ-साथ मौद्रिक प्रति फल भी प्राप्त करना चाहते हैं, पर मौद्रिक लाभ उनके लिए गौण होता है। वे मुद्रा को सिर्फ अपने कार्य की प्रगति के मापक के रूप में ही देखते हैं।

8. अवसरों काक्दिोहन- उद्यमी हमेशा व्यावसायिक अवसरों की खोज में रहता है। वह इनका विदोहन करके लाभ-अर्जित करता है। उद्यमी हर अवसर को एक चुनौती की भाँति। स्वीकार करता है, पर अवसरों का लाभ उठाने के लिए वह अपनी नैतिकता कभी नहीं खोता है।

9. आशावादी दृष्टि कोण-उद्यमी व्यक्तिका दृष्टिकोण आशावादी होता है। यह व्यावसायिक चुनौतियों से हार नहीं मानता, नही हानियों की दशा में निराश होता है। उसे अपने लक्ष्य की प्राप्ति में पूरा भरोसा होता है। साहसी अपने मार्ग में आने वाली बाधाओं से चिंतित नहीं होता है, वह सब कुछ गंवाने के पश्चात आशान हीं छोड़ता है।

10. एक संस्था-एक उद्यमी स्वयं में एक संस्था है, क्योंकि इसके कारण समाज में विभिन्न संस्थाओं का जन्म होता है। आज विकासशील देशों में कई संस्थाएं 'उद्यमी' के रूप में कार्य करती हैं। सरकार स्वयं एक उद्यमी बन कर राष्ट्र के औद्योगिक विकास में योगदान करती है। आधुनिक युग में उद्यमी का संस्थागत स्वरूप अत्यंत महत्वपूर्ण हो गया है।

11. पेशेवर वर्ग-आधुनिक युग में उद्यमी एक पेशेवर वर्ग के रूप में विकसित हो रहे हैं। प्राचीन मत के अनुसार उद्यमी पैदा होते हैं, बनाये नहीं जाते हैं। पर अब यह धारणा खत्म होती जा रही है। व्यावसायिक ज्ञान, प्रशिक्षण सुविधाओं तथा विभिन्न प्रेरणाओं की उपलब्धि के कारण अब उद्यमी भी विकसित किये जा सकते हैं।


BU BHOPAL, 2018